वाराणसी पुल हादसा: मुकदमा दर्ज होने के बावजूद कंपनी बरतती रही लापरवाही

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वाराणसी/लखनऊ: कैंट रेलवे स्टेशन के पास निर्माणाधीन फ्लाईओवर का एक बड़ा हिस्सा मंगलवार शाम गिर पड़ा था। इस हादसे में 18 लोगों की मौत हुई है। अन्य घायलों का इलाज अस्पताल में चल रहा है। लेकिन अब एक और अहम बात सामने आयी है, जिसमें बताया जा रहा है कि निर्माणधीन पुल बनाने वाली कंपनी के खिलाफ 19 फरवरी को सिगरा थाना में विभिन्न धाराओं में केस दर्ज हुआ था।

सेतु निगम के परियोजना प्रबंधक के खिलाफ यह मुकदमा दर्ज हुआ था। यह केस काम में लापरवाही बरतने, राहगीरों के प्रति सुरक्षा न बरतने, ट्रैफिक वॉलेंटियर्स को तैनात न करने, अराजकता पूर्वक कार्य करने समेत विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज हुआ था। मुकदमा दर्ज होने के बाद पुलिस ने मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया था।

डीएम के आदेश पर मुकदमा दर्ज 
मंगलवार को हुए पुल हादसे मामले में डीएम के आदेश के बाद सिगरा थाने में सेतु निगम के खिलाफ दर्ज मुकदमा दर्ज किया गया है। सेतु निगम के अधिकारियों और ठेकेदार खिलाफ गैर इरादतन हत्या, कार्य में लापरवाही बरतने सहित कई अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज हुआ है।

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विभिन्न धाराओं में केस दर्ज
बता दें, कि 19 फरवरी को सेतु निगम के परियोजना प्रबंधक के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ था। यह मुकदमा एसपी ट्रैफिक की शिकायत के बाद दर्ज की गयी थी। सिगरा थाने में धारा- 268, 243, 290 और 341 के तहत मामला दर्ज किया गया था। हालांकि, अभी तक फाइनल रिपोर्ट नहीं लगी है।

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आखिर इन मौतों का जिम्मेदार कौन?
अब सवाल ये उठता है कि जब प्रशासन को पहले ही पुल के निर्माण कार्य में अनियमितता की शिकायत मिल चुकी थी तो अब तक कार्रवाई क्यों नहीं की गई? अगर, ये कार्रवाई समय से हुई होती तो आज 18 बेगुनाहों की जान नहीं जाती। प्रदेश सरकार इस हादसे के बाद भले ही जांच टीम गठित कर 48 घंटे में रिपोर्ट सौंपने के आदेश दिए हों, कुछ को निलंबित किया हो, लेकिन इसका जवाब कौन देगा, कि मुकदमा दर्ज होने के बाद अब तक कोई कदम क्यों नहीं उठाया गया।

लापरवाह अफसरों की खुल रही पोल
शुरुआती जांच में ही सेतु निगम के लापरवाह अफसरों की पोल खुल रही है। जांच में सामने आ रहा है कि गार्डर के नीचे गलत तरह से बेयरिंग हटाते समय यह हादसा हुआ। बेयरिंग हटाने के दौरान ही बड़ी लापरवाही हुई। फ्लाईओवर के लहरतारा वाले छोर पर ढाले गए गार्डर को ऊपर रखा जा रहा था। पिलर पर गार्डरों को टिकाने के लिए बीम हटाई जा रही थी। पिलर के शिखर पर गार्डर को तुरंत ना रखकर पहले बेयरिंग पर रखा जाता है, जबकि यहां पिलर के शिखर पर सीधे गार्डर पर रखे जा रहे थे। दो गार्डरों की बेयरिंग हटने के बाद अचानक गार्डर का संतुलन बिगड़ा और ये हादसा हुआ।

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