कैराना उप चुनाव : इन दो विधानसभा क्षेत्र में लगी है दिग्गजों की इज्जत दांव पर

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सहारनपुर : उत्तर प्रदेश की फूलपुर और गोरखपुर लोकसभा सीट पर संपन्न हुए लोकसभा चुनाव में भाजपा की करारी हार के बाद अब कैराना सीट पर हो रहे उप चुनाव में भी भाजपा के दिग्गजों की इज्जत दांव पर लगी है। कैराना लोकसभा सीट मुजफ्फरनगर जनपद में आती है, लेकिन सहारनपुर जनपद की दो विधानसभा सीटें भी इस लोकसभा क्षेत्र से जुड़ी है और इन दोनों विधानसभा नकुड़ और गंगोह के मतदाता ही कैराना लोकसभा सीट के प्रत्याशियों का भविष्य तय करने में अहम रोल अदा करते हैं।

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कैराना लोकसभा सीट पर केवल रालोद ही ऐसी पार्टी है जिसने 1999 व 2004 में लगातार दो बार जीत दर्ज कराई है। नकुड़ व गंगोह विधानसभा के कैराना लोकसभा में जाने के बाद 2009 चुनाव में बसपा की तब्बुसम बेगम ने अपना परचम लहराया था। 2014 में मोदी लहर के चलते बाबू हुकुम सिंह ने जीत दर्ज की थी। बाबू हुकुम सिंह की मृत्यु के बाद 2018 में उप चुनाव होने जा रहे हैं। इससे पूर्व1996 में सपा, 1998 में भाजपा ने अपनी जीत का बिगुल बजाया था। कैराना लोकसभा में जातीय समीकरण भी हमेशा उम्मीदवारों के चयन में चिंतन का विषय रहा है।

लेाकदल के लिए मुस्लिम जाट गठबंधन कारगार सिद्ध हुआ है, तो कभी दलित वोट की लामबंदी बसपा के पक्ष में जीत का कारण बनी है।2014 का चुनाव भाजपा को जीत दिला गई। इस उपचुनाव में सभी पार्टियो के चिंता का विषय जातीय समीकरण की गुणा भाग भी है। जहां भाजपा को गोरखपुर व फूलपुर का उप चनुाव हारने का जख्म टीस पैदा कर रहा है। वहीं लोकदल के चिंता का विशय मुजफ्फरनगर दंगे व कैराना पलायन का भी हो सकता है। क्योंकि उप चुनाव में विपक्ष की जीत जहां गठबंधन की राजनीति को फलीभूत करेगी, वहीं हार से झटका लगना तय है। भाजपा की हार ओर जीत 2019 के चुनाव की हवा बना व बिगाड़ भी सकती है।

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नकुड़ और गंगोह विधानसभा क्षेत्र 

इन दोनों विधानसभा क्षेत्रों के दिग्गजों की इज्जत इस चुनाव में दांव पर लगी है। विधानसभा चुनाव में इस सीट से बसपा छोड़कर भाजपा में शामिल हुए धर्म सिंह सैनी ने जीत दर्ज की थी। धर्म सिंह सैनी इस वक्त प्रदेश सरकार में राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार है। लेकिन जब से वह मंत्री बने हैं, तभी से उनका क्षेत्र के भाजपा कार्यकर्ताओं में खासा विरोध हो रहा है। इसका कारण भी है। जब से सैनी मंत्री बने हैं, तभी से किसी भी कार्यकर्ता का कोई काम सरकार में रहते नहीं करा पाए है। इसका उदाहरण इसी से देखने को मिलता है कि नकुड़ में पिछले काफी समय से जमीन से जुड़ा एक मामला काफी चर्चाओं में रहा है। जमीन कब्जाने के आरोपी की गिरफ्तारी को लेकर मुख्यमंत्री तक आदेश दे चुके हैं, लेकिन इसके  बावजूद आरोपी याकूब निजामी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है।

जिला पुलिस तो सैनी की कुछ सुनती ही नहीं है। यह मामला करीब एक साल से चला आ रहा है, लेकिन याकूब निजामी की गिरफ्तारी न होने से भाजपा कार्यकर्ता और जनता मंत्री से नाराज ही चली आ रही है। इसी को देखते हुए पिछले दिनों यहां पर शिकारपुर के विधायक अनिल शर्मा को नकुड़ भेजा गया, ताकि कैराना लोकसभा सीट पर भाजपा प्रत्याशी को जीत दिलाई जा सके। याकूब निजामी की गिरफ्तारी न होने की बात जब शिकारपुर विधायक अनिल शर्मा को पता चली तो उन्होंने प्रदेश के डीजीपी और अन्य अधिकारियों से वार्ता कर याकूब निजामी की गिरफ्तारी कराई।

अब बात करते हैं गंगोह विधानसभा क्षेत्र की। यहां के विधायक प्रदीप चौधरी विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए और विधायक बने। प्रदीप की अपने क्षेत्र के लोगों पर खासी पकड़ है। इसका कारण भी है कि वह अपने क्षेत्र के ग्रामीण क्षेत्रों का लगातार भ्रमण करते हैं और समस्याओं का निराकरण कराते हैं। कैराना लोकसभा सीट भाजपा के खाते में जाए इसके लिए विधाक प्रदीप चुनाव प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही क्षेत्र में प्रचार प्रसार करते आ रहे है।

हिंदू नहीं चाहता मुस्लिम बने सांसद

गंगोह और नकुड़ विधानसभा क्षेत्र पूर्व विधायक इमरान मसूद और उनके बडे़ भाई नौमान मसूद के प्रभावशाली सीट है। इन दोनों सीटों पर मतदाताओं में किसी तरह का उत्साह नजर नहीं आ रहा है। कारण साफ है कि इन दोनों सीटों के हिंदू मतदाता चाहते हैं कि कोई हिंदू ही लोकसभा में जाए, ताकि उनके हित की बात हो सके।

नकुड के देवेंद्र चौहान बताते हैं कि यदि इस सीट से मुस्लिम तब्बसुम हसन विजयी हो जाती है तो उनके बेटे नाहिद हसन के हौसले फिर से बुलंद हो जाएंगे। नाहिद हसन पर पूर्व में भी अपराधियों को संरक्षण देने के आरोप लगते रहे है। इसलिए इन दोनों क्षेत्र के हिंदू मतदाता नहीं चाहते हैं कि कैराना लोकसभा सीट से कोई मुसलमान सांसद बने। नाहिद पर यह भी आरोप लग चुके हैं कि वह न केवल अपराधियों को संरक्षण देते हैं बल्कि उनके पावरफुल होने से अवांछित तत्वों को बढ़ावा मिलता है इसका नुकसान हिंदुओं को उठाना पड़ता है। नाहिद कब क्या बोल दें,कुछ नहीं कहा जा सकता है। प्रदेश में सपा सरकार के कार्यकाल में कैराना से पलायन का जिम्मेदार भी माना जा चुका है। इन दोनों सीटों पर तब्बसुम हसन के बेटे नाहिद की छवि साफ नहीं है। जनता नहीं चाहती कि नाहिद को पावर मिलें।

कुल मिलाकर कैराना लोकसभा क्षेत्र की नकुड़ और गंगोह विधानसभा सीटों पर दिग्गजों की इज्जत दांव पर लगी है। नकुड़ विधायक और राज्यमंत्री डाक्टर धर्म सिंह सैनी, गंगोह विधायक प्रदीप चैधरी, सहारनपुर सांसद राघव लखनपाल शर्मा और विपक्ष की ओर से सपा जिलाध्यक्ष चैधरी रूद्रसेन, लोकदल जिलाध्यक्ष राव केसर सलीम और स्वयं तब्बसुम हसन की इज्जत दांव पर है। सभी का प्रयास यह है कि किसी तरह से सीट उनके हिस्से में आ जाए। अब यह तो नकुड़ और गंगोह के मतदाताओं को ही तय करना है कि वह जिसे अपना प्रतिनिधि चुनना चाहते हैं।

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