कोर्ट- चाइनीज मांझे पर पाबंदी के लिए जमीनी स्तर पर क्या कार्रवाई हो रही है 

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लखनऊ : इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने चाइनीज मांझे पर पूर्ण प्रतिबंध की मांग पर राज्य सरकार से पूछा है कि वह इस पर प्रतिबंध लगाने के लिए जमीनी स्तर पर क्या कार्रवाई कर रही है। कोर्ट ने केंद्र सरकार से यह भी पूछा है कि क्या चाइनीज मांझे पर किसी प्रकार का प्रतिबंध उसकी ओर से लगाया गया है। दोनों सरकारों को इस मामले पर दो सप्ताह में जवाब देना है।
यह आदेश जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस अब्दुल मोईन की बेंच ने एक स्थानीय वकील  की आरे से दायर जनहित याचिका पर पारित किया। याचिका में चाइनीज मांझे पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का आदेश केंद्र व राज्य सरकार को देने की मांग की गई है। याचिका पर सुनवाई के दौरान सरकारी वकील ने कोर्ट को बताया कि 16 नवम्बर 2017 के शासनादेश के द्वारा राज्य सरकार चाइनीज मांझे पर प्रतिबंध लगा चुकी है। इसे बनाना, स्टोर करना, बेंचना और इस्तमाल करना राज्य में पूरी तरह से प्रतिबंधित किया जा चुका है।
याची की दलील थी कि बावजूद इसके चाइनीज मांझे के कारण दो पहिया वाहन सवारों के साथ हो रहे हादसे सामने आ रहे हैं। इस पर कोर्ट ने सरकारी वकील को राज्य सरकार से निर्देश प्राप्त कर यह बताने को कहा कि शासनादेश को लागू कराने के लिए वास्तव में जमीनी स्तर पर क्या कार्रवाई की जा रही है ताकि यह शासनादेश रद्दी का टुकड़ा न बन जाए। वहीं कोर्ट ने केंद्र सरकार के वकील केा भी सरकार से निर्देश प्राप्त कर कोर्ट को अवगत कराने का आदेश दिया कि क्या केंद्र की ओर से चाइनीज मांझे पर कोई पाबंदी लगाई गई है। मामले की अगली सुनवाई 4 जुलाई को होगी।

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