इस वैलेंटाइन- सबसे खास लव स्टोरी, कैसे एक दूजे के हुए प्रमोदिनी-सरोज

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लखनऊ : अक्सर लोग चेहरे के रंग और रूप को देख के ही अपने लिए दुल्हन पसंद करते हैं। लेकिन दूसरी तरफ कुछ ऐसे भी लोग हैं जिनके लिये मन की सुंदरता आज के युग में भी ज्यादा मायने रखती है। ऐसी ही एक अनोखी लव स्टोरी का गवाह बुधवार को लखनऊ का शीरोज कैफे बना, जहां उड़ीसा के रहने वाले सरोज और आठ साल पहले खौफनाक एसिड अटैक का शिकार हुई प्रमोदिनी ने एक दूसरे को अंगूठी पहनाकर सगाई की रस्म पूरी की और साथ जीने मरने की कसम खाई।

14 फरवरी 2016 को हुआ था प्यार का इजहार

प्रमोदिनी ने न्यूजट्रैक डॉट कॉम से बातचीत में कहा कि वर्ष 2016 में 14 फरवरी की रात 11 बजे सरोज ने उन्हें प्रपोज किया था। उस समय आँखों से दिखाई नही देता था। तब उन्होंने सरोज से कहा कि एक बहू और पत्नी बनना और फर्ज निभाना बहुत कठिन काम है। इसलिए जब आँखों से दिखाई देने लगेगा तो इस बारे में फैसला लूंगी। इसके बाद एक हवाई यात्रा कर दौरान मुझे आँखों से दिखना शुरू हुआ, उस समय सरोज मेरे साथ थे। मैंने उन्हें देखा और इस रिश्ते के लिए हां कर दी।

4 महीने अपने पैरों से सहारा देकर चलाया

Newstrack.com  से सरोज ने बातचीत में बताया कि वो कटक में एक निजी मेडिकल कंपनी में मेडिकल रिप्रेजेन्टेटिव के पद पर कार्यरत थे और संयोग से उसी हॉस्पिटल में पहुंचे। जहां प्रमोदिनी उर्फ़ रानी का इलाज चल रहा था। एक नर्स ने उन्हें प्रमोदिनी से मिलवाया। उसी वक्त सरोज ने प्रमोदिनी का साथ देने का निर्णय ले लिया। दोनों में दोस्ती हो गई।कंपनी और समाज के अन्य लोगों के मना करने के बावजूद सरोज अपनी दोस्त प्रमोदिनी से रोजाना मिलने आने लगे। डॉक्टर ने उन्हें बताया की प्रमोदिनी कभी चल नहीं सकेंगी और देख नहीं पाएंगी। उन्होंने डॉक्टर को भी चैलेंज किया कि वह प्रमोदिनी की हालत कुछ ही दिनों में सुधार देंगे।

सरोज ने बताया कि प्रमोदिनी उन दिनों बेड पर ही रहती थीं। वह बिना किसी के सहारे के खुद से एक कदम भी चल नहीं पाती थीं। ऐसे में सरोज ने उन्हें अपने पैरो पर पैर रखकर चलना सिखाया और चार महीने में ही उन्हें ठीक कर दिया। इस चमत्कार को देखकर डॉक्टर भी सरोज की इच्छाशक्ति का लोहा मन गए। इस दौरान सरोज की नौकरी चली गई लेकिन उसने हार नहीं मानी।

उड़ीसा सरकार ने दिया शीरोज का तोहफा

सरोज ने बताया कि ठीक होने के बाद प्रमोदनी शिरोज कैफे की छाँव फाउंडेशन के टच में आ गईं। कई दिन प्रमोदिनी ने  लखनऊ स्थित शिरोज कैफे में काम भी किया। फिर वह दिल्ली के शीरोज कैफे चली गईं। इस दौरान भी सरोज उनके साथ रहे। सगाई के बाद वो उड़ीसा सरकार द्वारा निर्मित किये गए शीरोज कैफे का संचालन करेंगे।

लैक्मे फैशन वीक की टीम भी पहुंची

प्रमोदिनी और सरोज की सगाई में समाजवादी नेता सुनील सिंह ‘साजन’, कवि सर्वेश अस्थाना, कैलाश जोशी, प्रसून, उड़ीसा समाज के प्रतिनिधि के अलावा टीसीएस और लैक्मे फैशन वीक की टीम भी पहुंची। उड़ीसा समाज ने जोड़ी को 25 हजार रुपये का चेक दिया। टीसीएस और लैक्मे फैशन की टीम ने भी कपल को तोहफे दिए।

प्रमोदिनी बोली- सरोज ही मेरे सब कुछ

प्रमोदिनी ने बताया कि बचपन में ही उनके पिता गुजर गए थे। 8 साल पहले हुए एसिड अटैक के बाद उनके  परिवार के कई लोगो ने उनहे सपोर्ट नहीं किया। केवल सरोज ने ही उन्हें सपोर्ट किया। अब सरोज ही उनका परिवार, दोस्त, शुभचिंतक है। वहीं सरोज ने भी अपने परिवार में प्रमोदिनी के बारे में बताया, थोड़े मान मनौवल के बाद सब मान गए। सगाई में उनके परिवार के कुछ सदस्यो ने भी शिरकत की।

2009 में हुआ था एसिड अटैक

प्रमोदिनी ने बताया कि वर्ष 2009 में वह 12 वीं में पढ़ती थीं और महज 16 साल की थी। तब उड़ीसा के जगत सिंहपुर जिले में उनके पड़ोस में रहने वाले एक व्यक्ति ने एसिड अटैक किया था। वह उनसे एकतरफा प्यार करता था। इस अटैक के बाद प्रमोदनी कई महीने कोमा में रहीं। इस दौरान प्रमोदिनी के परिजनों ने इंसाफ के लिए लंबी लड़ाई लड़ी। इसके बाद आरोपी को पुलिस ने पकड़ा।

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