रिसॉर्ट पॉलिटिक्स का नाम तो बहुत सुना होगा, जानिए कब-कब नेताओं ने इसे बनाया हथियार

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शारिब जाफरी 
शारिब जाफरी 

लखनऊ : सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद कर्नाटक में भाजपा के बीएस को बहुमत साबित करने के लिए सिर्फ 60 घंटे का समय मिला है। यानि अब बहुमत साबित करने के लिए येदियुरप्पा के पास 24 घंटे से भी कम का वक़्त बचा है। चुनाव नतीजों के बाद त्रिशंकु विधानसभा के चलते राज्यपाल वजूभाई वाला ने बीएस येदियुरप्पा को शपथ दिलाई थी और 15 दिन में बहुमत साबित करने को कहा था। राजनितिक जोड़तोड़ की आशंकाओं के चलते काँग्रेस और जेडीएस ने अपने अपने विधायकों को रिज़ॉर्ट में एक साथ पहुंचा दिया है। 

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कर्नाटक में यह स्थिति कई बार पेश आ चुकी है। जब हंग असंबली के चलते राजनीतिक दलों को अपने विधायक बचाने के लिए रिसॉर्ट का सहारा लेना पड़ा हो। अपने विधायकों को बचाने के लिए  होटलों और रिसॉर्ट में ले जाकर खरीद-फरोख्त से बचाने की कोशिशें देश की सियासत में कोई नई इबारत जैसी नहीं है। 1982 से हरियाणा में शुरू हुआ रिसॉर्ट का खेल उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, तमिलनाडू, बिहार और गुजरात में भी खेला जा चुका है।

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बीएस येदुरप्पा का रिसॉर्ट से लाईफ लाइन का कनेक्शन 

देश की राजनीति में रिसॉर्ट कनेक्शन की शुरुवात भले ही हरियाणा से हुई हो लेकिन रिसॉर्ट में रुक कर सरकार बनाने और गिराने का सब से ज़्यादा खेल कर्नाटका में ही खेला गया है। कांग्रेस और जेडीएस आज जिस रिसॉर्ट पॉलिटिक्स के ज़रिये बीएस येदियुरप्पा को धराशाई करने की कोशिश में हैं, कुछ इसी तरह का खेल बीएस येदुरप्पा 2009 से 2011 के बीच अपनी सरकार को बचाने के लिए खेल चुके हैं। इस दौरान बीएस येदियुरप्पा भाजपा के 80 विधायकों को लेकर बेंगलुरू के एक रिसॉर्ट में जाकर ठहरे थे। 

रिसॉर्ट में विधायकों को एकजुट रखने की सब से ज़्यादा परंपरा कर्नाटका में ही निभाई गई है। 1983 में रामकृष्ण हेगड़े तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के हाथों सरकार भंग किए जाने से बचाने की कोशिश में थे। जिस के बाद हेगड़े अपने विधायकों को एकजुट रखने के लिए एक होटल में रुके थे। कर्नाटक में यही दस्तूर 2004, 2006, 2008 और 2012 में भी निभाया गया।

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उत्तर प्रदेश कल्याण सिंह ने शुरू किया था खेल 

राजस्थान के राज्यपाल कल्याण सिंह ने 1998 में यूपी में रिसॉर्ट पॉलिटिक्स की नींव रखी थी। तत्कालीन राज्यपाल रोमेश भंडारी ने लोकसभा चुनाव के दौरान कल्याण सिंह के नेतृत्व वाली सरकार को बर्खास्त कर दिया था। कांग्रेस नेता जगदंबिका पाल को मुख्यमंत्री बना दिया। 

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विधान सभा में बहुमत साबित होने तक कल्याण सिंह अपने विधायकों को रिसॉर्ट में ले गए थे। विधान सभा में विश्वास मत के दौरान लौटकर जीत हासिल की थी। यह मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट तक पहुंचा था। जहां कल्याण सिंह ने राज्यपाल के फैसले को चुनौती भी दी। फैसला कल्याण सिंह के हक़ में हुआ था।

रिसॉर्ट पॉलिटिक्स ने गिरा दी थी सुशासन बाबू की सरकार 

सुशासन बाबू नितीश कुमार भी रिसॉर्ट पॉलिटिक्स के फेर में फंस चुके हैं। वर्ष 2000 में तत्कालीन राज्यपाल ने नीतीश कुमार को सरकार बनाने का न्योता दिया और एक सप्ताह में बहुमत साबित करने को कहा था। जिस के बाद कांग्रेस तथा राष्ट्रीय जनता दल ने अपने विधायकों को पटना के एक होटल में भेज दिया। इन विधायकों को होटल में रखने का मक़सद यह था, कि उन्हें लालच न दिया जा सके। 

सीएम की गद्दी पर सात दिन विराजमान रहने के बाद नीतीश कुमार विश्वासमत हार गए। और उन्हें इस्तीफा देना पड़ा।इसी तरह लोक जनशक्ति पार्टी ने 2005 में नीतीश कुमार की मदद के लिए अपने विधायकों को जमशेदपुर के एक होटल में रखा गया था। 

गुजरात में शंकर सिंह बाघेला ने खेली रिज़ॉर्ट पॉलिटिक्स

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के धुर विरोधी माने जाने वाले शंकर सिंह वाघेला ने 1995 में क़रीब चार दर्जन विधायकों को अपने पाले में लाकर भाजपा से बगावत कर दी थी। 

बग़ावत करने वाले विधायकों के साथ शंकर सिह वाघेला उन्हें लेकर मध्य प्रदेश के एक होटल में एक सप्ताह तक टिके रहे थे। जिस के बाद समझौते के तहत केशूभाई पटेल की जगह पर सुरेश मेहता को मुख्यमंत्री बना दिया गया था। सुरेश मेहता-शंकर सिंह वाघेला के समर्थक बताए जाते थे। 

जयललिता के देहांत के बाद तमिलनाडु में रिसॉर्ट पॉलिटिक्स 

तमिलनाडु की सीएम जयललिता के देहांत के बाद 2017 में जब ओ पन्नीरसेल्वम ने मुख्यमंत्री पद                      छोड़ा, और एआईएडीएमके नेता वी के शशिकला पर दबाव डालने का आरोप लगाया। जिस के बाद शशिकला ने अपने वफादार विधायकों को चेन्नई के एक रिसॉर्ट में शिफ़्ट करा दिया था।

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विलासराव देशमुख कांग्रेस विधायकों को ले गए थे रिसॉर्ट

कांग्रेस के तत्कालीन मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख अपने विधायकों को बेंगलुरू के लक्ज़री रिसॉर्ट में ले गए थे। विलासराव देशमुख को डर था, कहीं शिवसेना और भाजपा गठबंधन उनके विधायकों को अपने साथ न मिला लें। इसी डर से विलासराव देशमुख ने अपने विधायकों को रिसॉर्ट में शिफ्ट करा दिया था। 

हरियाणा से शुरू हुआ था रिसॉर्ट पॉलिटिक्स का खेल 

हरियाणा में भाजपा और इंडियन नेशनल लोकदल गठबंधन के कांग्रेस से ज़्यादा विधायक थे। लेकिन तत्कालीन राज्यपाल जीडी तापसे ने कांग्रेस नेता भजन लाल को मुख्यमंत्री बनाने का न्योता दे दिया। जिस के बाद इंडियन नेशनल लोकदल के नेता चौधरी देवीलाल गठबंधन के विधायकों के साथ दिल्ली के एक होटल में आ कर ठहर गए। बावजूद इस के इंडियन नेशनल लोकदल के एक विधायक ने पाईप लाईन के सहारे उतर कर कांग्रेस को समर्थन दे दिया। जिस की वजह से भजनलाल की सरकार ने सदन में बहुमत साबित कर दिया।

बीमार एनटी रामाराव को हटा कर एन भास्कर राव को बना दिया सीएम 

देश की राजनीति में शायद यह सब से अनूठा शक्ति प्रदर्शन था। आंध्र प्रदेश में 1984 में तत्कालीन सीएम एन टी रामाराव हार्ट सर्जरी के लिए अमेरिका गए थे। जिस के बाद राज्यपाल रामलाल ने एन भास्कर राव को सीएम की शपथ दिला दी। ओपन हार्ट सर्जरी कराने के बाद लौटे एन टी रामाराव एनटीआर तेलगूदेशम पार्टी के विधायकों को लेकर बेंगलुरु के रिज़ॉर्ट के बाद दिल्ली ले गए थे। जिस के बाद सरकार गिर गई और एन टी रामाराव फिर सीएम बन गए।

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