हर दिन ऐसे रहता है राहु काल, शनि से भी खराब है इनका प्रकोप

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जयपुर: राहु का प्रकोप शनि से भी खराब माना जाता है। राहु की खराब दशा जब किसी पर पड़ती है तो व्यक्ति की बुद्धि और विवेक दोनों का नाश होने लगता है। ज्योतिष के अनुसार बुद्धि-विवेक नाशक राहु ग्रह का प्रभाव व्यक्ति के जीवन पर सबसे अधिक पड़ता है।

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राहु की महादशा या अंतर्दशा जब किसी जातक की चलती है तो व्यक्ति की मानसिक स्थिति असामान्य हो जाती है। राहु की जब युति या दृष्टि योग बनती है तो कुंडली का कोई भी स्थान और ग्रह को बुरी तरह प्रभावित करता है। इस दौरान व्यक्ति के अपने ही उसके शत्रु बन जाते हैं। इतना ही नहीं कुंडली के 12 वें भाव में बैठा राहु जेल की यात्रा भी करा सकता है। राहु ग्रह के साथ सबसे बुरी बात ये है कि न चाहते हुए भी व्यक्ति बुरे काम करने के लिए बाध्य हो जाता है।

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सप्ताह के सातों दिन पड़ने वाला राहु काल अनिष्ट कार्य करवाने की प्रबल क्षमता रखता है। इसलिए सप्ताह के सभी दिन पड़ने वाले राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए। राहु काल प्रत्येक दिन 90 मिनट तक रहता है यानि कुल मिलाकर डेढ़ घंटे की अवधि राहु काल की होती है। यह राहु काल की स्थिति स्थानीय समय के अनुसार निर्धारित होती है।

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ज्योतिष के अनुसार सोमवार को राहु काल की अवधि आमतौर पर सुबह 7 बजकर 30 मिनट से लेकर 9 बजे तक रहती है। राहु काल की अवधि के दौरान किए गए कोई भी कार्य शुभफलदायक नहीं होते हैं। इसलिए राहु काल में कोई भी कार्य से बचना चाहिए।
 ज्योतिष शास्त्र के अनुसार मंगलवार के दिन राहु काल दोपहर 3:00 बजे से 04:30 बजे तक होती है। इसलिए राहु काल की अवधि में किसी भी प्रकार के कार्यों को नहीं करना चाहिए।
  ज्योतिष शास्त्र के अनुसार बुधवार के दिन राहु कल की अवधि भी डेढ़ घंटे की होती है। बुधवार के दिन राहु काल की यह अवधि दोपाहर 12:00 बजे से लेकर 01:30 बजे तक होती है। राहु काल की इस अवधि के दौरान कोई भी कार्य करना निषेध माना गया है।
गुरूवार को राहु काल दोपहर 01 बजकर 30 मिनट से प्रारंभ होता है जो दोपहर 03:00 बजे तक रहता है। राहु काल की अवधि में कोई भी कार्य करने से बचना चाहिए।ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शुक्रवार को राहु काल सुबह 10 बजकर 30 मिनट से शुरू होता है और दिन के 12:00 तक रहता है।
शुक्रवार को भी राहु काल की अवधि भी डेढ़ घंटे की होती है। शास्त्रों के अनुसार राहु काल की अवधि में कोई भी कार्य करने से परहेज करना चाहिए। राहु काल की अवधि में कोई भी कार्य सफल नहीं माने जाते हैं।
ज्योतिष की गणना के अनुसार शनिवार को राहु काल का समय सुबह 9:00 बजे से प्रारंभ होता है और 10 बजकर 30 मिनट तक रहता है। शुक्रवार को भी राहुकाल की यह अवधि शुभ नहीं मानी जाती है। इसलिए इस अवधि में किसी भी प्रकार का शुभ कार्य नहीं करना चाहिए।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार रविवार को भी राहु काल की अवधि भी डेढ़ घंटे की मानी गई है। रविवार को राहु काल शाम 4 बजकर 30 मिनट से प्रारंभ होती है और 6:00 तक रहती है। इसलिए रविवार के दिन पड़ने वाले राहु कल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए।